गुरुवार, अक्तूबर 07, 2010

नवरात्र कविता उत्सव में आपका स्वागत है


               शरद नवरात्र में प्रतिदिन एक कवयित्री की कविता

कल आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शरद नवरात्र प्रारम्भ होने जा रहा है । वर्ष में दो बार आने वाले इस पर्व पर मैं विगत दो नवरात्र से कवयित्रियों की कविताएं प्रस्तुत करता आ रहा हूँ । इस श्रन्खला में सर्वप्रथम मैंने हिन्दी की कवयित्रियों की कविताएँ प्रस्तुत की थीं । उसके अगले नवरात्र में विदेशी कवयित्रियों की कविताओं के हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किये थे । आप सब ने इन कविताओं को पढ़ा था एवं इनकी सराहना की थी और भरपूर टिप्पणियों के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी । 
            आप सभी के स्नेह एवं प्रोत्साहन के फलस्वरूप इस नवरात्र में भी मै यह श्रन्खला जारी रखना चाहता हूँ । इस बार इस श्रन्खला में आप पढ़ेंगे भारतीय भाषाओं की कवयित्रियों की कवितायें । इनमें मैंने सिंधी , मराठी , असमिया , पंजाबी , तेलगु , मलयाळम , मैथिली , डोगरी व उर्दू की कविताएँ शामिल की हैं । कविताओं के हिन्दी अनुवाद  कुछ कवयित्रियों द्वारा स्वयं  किये गए हैं और कुछ अनुवादकों द्वारा ।
            इनमें से अधिकांश कवयित्रियों की कविताओं का चयन मैंने साहित्य अकादमी की द्वैमासिक पत्रिका “ समकालीन भारतीय साहित्य “ से किया है । समकालीन भारतीय साहित्य के सम्पादक प्रसिद्ध आलोचक व लेखक श्री प्रभाकर श्रोत्रिय से मेरा संवाद हुआ है । श्रोत्रिय जी ने सहर्ष इन कविताओं को ब्लॉग पर प्रस्तुत करने हेतु अनुमति प्रदान कर दी है । मेरे सहयोगी मित्र व कवि अनुवादक तथा ब्लॉगर सिद्धेश्वर जी से भी मेरा संवाद हुआ है । उन्होनें भी हमेशा की तरह इस श्रंखला में प्रस्तुत करने के लिए कुछ कविताओं के अनुवाद किये हैं ।
            आज इस पोस्ट द्वारा मैं आप सभी से निवेदन कर रहा हूँ कल से प्रतिदिन एक विशिष्ट कविता पढ़ने के लिए इस ब्लॉग पर दिन में एक बार अवश्य पधारें । प्रत्येक कविता की प्रस्तुति से पूर्व परम्परानुसार विगत दिन के आगंतुकों का स्वागत होगा ही ।
            आज स्वागत एव धन्यवाद समकालीन भारतीय साहित्य के सम्पादक वरिष्ठ साहित्यकार प्रभाकर श्रोत्रिय जी का  । डॉ. प्रभाकर श्रोत्रिय का जन्म १९ दिसंबर, १९३८ को जावरा (मध्यप्रदेशभारत में हुआ। हिंदी आलोचना में प्रभाकर श्रोत्रिय एक महत्वपूर्ण नाम है । आलोचना के अलावा भी साहित्य में उनका प्रमुख योगदान रहा है । खास कर नाटकों व निबंध के क्षेत्र में । उन्होंने कम नाटक लिखे पर जो भी लिखे उसने हिंदी नाटकों को नई दिशा दी। पूर्व में मध्यप्रदेश साहित्य परिषद के सचिव एवं 'साक्षात्कार' 'अक्षरा' के संपादक रहे हैं एवं भारतीय भाषा परिषद के निदेशक एवं 'वागर्थ' के संपादक पद पर कार्य करने के साथ-साथ वे भारतीय ज्ञानपीठ नई दिल्ली के निदेशक पद पर भी कार्य कर चुके हैं ।  आप अनेक महत्वपूर्ण संस्थानों के सदस्य हैं।

( प्रभाकर श्रोत्रिय जी का चित्र गूगल से साभार )